2011 നവംബർ 20, ഞായറാഴ്‌ച

आदमी का बच्चा
( यशपाल) कहानी

निबंध

गरीब बच्चे जीवन की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
समाज में उच्च वर्ग के तथा निम्न वर्ग के लोग दिखाई देते हैं।यह विभाजन मुख्य रूप से धन संपत्ति के आधार पर होता है। धन के अभाव में गरीबों को आवश्यक भोजन व शिक्षा नहीं मिलते। उन्हें समाज में एक तरह से उपेक्षित जीवन बिताना पड़ता है।
आदमी का बच्चा - कहानी में भी यही बात देखने को मिलती है। डौली केलिए जीवन की सुख-सुविधाएँ काफ़ी थी। उसकी देख-भाल भी बड़ी सतर्कता से की जाती है।लेकिन धोबी-माली के बच्चे तो गरीब हैं। उनका पालन -पोषण के लिए पर्याप्त धन उनके पास नहीं होते । सफ़ाई आदि में भी वे पीछे रह जाते हैं। धन और शिक्षा की कमी के कारण ही उच्च वर्ग के लोग
उन्हें बेहुदे तक कहते है।
समाज का यह कर्तव्य है कि आधुनिक समाज के मनुष्यों में इस तरह


आदमी का बच्चा

डौली (चरित्रगत विशेषताएँ)
आदमी का बच्चा - कहानी का मुख्य पात्र है- डौली।
वह बग्गा साहब की इकलौती पुत्री है। घर में तो किसी का भी अभाव नहीं है।अकेली होने के कारण वह धोबी-माली के बच्चों के साथ खेलना चाहती है। लेकिन मामा उसे रोकती है। जब डैनी के पिल्ले होते है,तब वह बहूत खुश होती है।वह उसके साथ खेलना चाहती है। लेकिन बग्गा साहब उन पिल्लों को भी मरवा डालते हैं।
भूख के कारण ही पिल्लों को मरवा डाला है।यह जानकर डौली विस्मित होती है।
धोबी के बच्चा जब मर जाता है तो डौली आया से पूछती है- क्या माली के बच्चे को भी गरम पानी में डूबवाकर मार दिया गया है ?
इस प्रकार डौली में हम एक भोले-भाले बच्चे को देखते हैं।

2011 നവംബർ 6, ഞായറാഴ്‌ച

शहरीकरण प्रगतिशील समाज का अभिन्न अंग बन गया है। इकाई ३ नज़रें नज़ारे

समस्या - शहरी जीवन का तनाव पारिवारिक जीवन का कारण बन जाता है।
अध्ययन लक्ष्य- जीवन को संघर्षमुक्त करने केलिए औरों से हार्दिक
रखने की आवस्यकता से अवगत कराना।

शहरीकरण से सामूहिकता की भावना नष्ट हो रही है।
इस इकाई में आत्मकेन्द्रित मानव की मानसिकता
व्यक्त करनेवाली कविता- वह तो अच्छा हुआ , यशपाल की कहानी
आदमी का बच्चा, एवं नदीरा ज़हीर बब्बर का एकपात्रीय नाटक -सकुबाई
अतिरिक्त वाचन - समा बँध गया यात्राविवरण आदि हैं।