2012 ഫെബ്രുവരി 7, ചൊവ്വാഴ്ച

std 8


पाठकनामा
आदरणीय संपादकीय,
आपके धान की खेती : राहत और प्रोत्साहन ज़रूरी संपादकीय पढ़ने का अवसर मुझे मिला। चावल के उत्पादन बढ़ाने के लिए बहूत प्रयत्न करते हैं।पर यहाँ खेत की कमी है।एक हद तक शिक्षा में हुई उन्नति खेती कम होने के कारण है। खेती को बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से सहयोग मिलना ज़रूरी है।

आपके संपादकीय किसानों को सहायता मिलने की संभावना है।इस प्रकार केरल के किसानों के मन में खेती के प्रति रूचि बढ़ा सकता है।

फिल्मी समीक्षा
पूस की रात
मूलकथा : प्रेमचंद
पटकथा : गुलज़ार
निदेशक : गुलज़ार
गीत : रूपकुमार रातोड़
कलाकार : रघुवीर करण
मानसी उपाध्याय












किसान का जीवन कितना महत्वपूर्ण है।खेती से उनको कोई सुख नहीं मिला। पूरा जीवन काल गरीबी में गुज़रता है। इन बातों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करनेवाली एक सुंदर फिल्म है- पूस की रात। प्रेमचंद की एक छोटी कहानी गुलज़ार के निदेशन में फिल्म के रूप में पर्दे पर आयी है।फिल्मी की कहानी इस प्रकार है।

एक गरीब किसान हल्कु अपनी पत्नी के साथ रहता है।खेत में फसल पकने लगी है।रात के समय खेत में नीलगायों के आने की संभावना है। इसलिए हल्कु रात में खेत का पहराया करता है।हड्डियों भी तोड़नेवाली ठंड मे वह अपने कुत्ते के साथ गीत गाकर या बातें करके ठंड से बचने की कोशिश करता है। गर्मि के लिए वह चिलम फूँकना भी है

खेती के लिए महाजनों से कर्ज लिए पैसे वापस देने में भी वह असमर्थ है। हल्कु की पत्नी के मन में खेती की अपेक्षा मज़दूरी करना ही अच्छा है।

एक ठंडी रात में हल्कु ठंड सह न सका। वह कुछ सुख पत्ते लाकर आग जलाकर उसके सामने नाच गाकर सर्दी से बचकर लेटा । आग की गर्मि के कारण उसको गहरी नींद मिले। पर उस रात में आग फैलकर सारी फसल जल गयी।

2012 ഫെബ്രുവരി 6, തിങ്കളാഴ്‌ച

आत्मकथा


नदी की आत्मकथा
मैं अपने पिता पवित्र हिमालय का प्यार पाकर पली थी। तब मैं कितनी खुशी में थी। बड़ी मजबूत ,ओज -भरी नदी थी।कल-कल करके बहकर आते वक्त राह में खड़े पेड़ पौधों से बातें करके और छोटी पहाड़ियों से बातें करके और छोटी पहाड़ियों से दोस्ती करके आती थी।वह मेरे जीवन का वसंतकाल था।मेरे जल में कई तरह की मछलियाँ थी।उनका तैरना मैं आनंद से देखती थी।बाघों का खेल ,कछुओं के पीठ से उलीचा जाना हाथियों की जलक्रीड़ा आदि मैं खुशी के साथ सहती थी।लोग अपने खेतों की सिंचाई और घर की उपयोगिता केलिए मेरा जल लेते थे ।ये सब मैं पसंद करती थी क्योंकि तब मैं उतनी स्वच्छ थी।
काल बदलने के अनुसार मेरा रूप भी बदल गया ।इसका उत्तरदायी मैं नहीं।मुझे प्यार करनेवाले लोगों ने ही मुझे गंदा करना शुरू किया ।नहाना,जानवरों को नहलाना ,कूड़ा कचरा डालना आदि से उन्होंने दुबली और गंदी हो गयी।कारखानों से लाभ उठानेवाले लोग वहाँ के अवशेष मुझ में डालते हैं। तब से मैं काली बन गयी लोगों का यह काम भी मैं मौनरूप से सहती हुँ।
मेरा दुख यह है कि स्वच्छता की बात मैं एक साबुन की टिकिया के पीछे है।क्यों ये लोग मुझ से ऎसा व्यवहार करते हैं ? क्या मैं उनका साथी नहीं हुँ ? मेरा विश्वास है कि जल्द ही जल्दवे मेरी सुरक्षा का उपाय ढूँढेंगे ।

2012 ഫെബ്രുവരി 3, വെള്ളിയാഴ്‌ച

FLASH NEWS

സംസ്ഥാന സര്‍ക്കാര്‍ ജീവനക്കാരുടെ യാത്രാബത്ത
പരിഷ്കരിച്ചു.
2012 ഗ്രൂപ്പ് പേഴ്സണല്‍ ആക്സിഡന്റ് ഇന്‍ഷുറന്‍സ് ചേരാനുളള സമയപരിധീ തീയതി നീട്ടി ....ഫെബ്രുവരി 29

2012 ഫെബ്രുവരി 2, വ്യാഴാഴ്‌ച


अफ्रिय है उनकी नज़र में (निर्मला पुतुल) मलयालम

കവിത

അവരുടെ ദൃഷ്ടിയില്‍ എനിക്കുളളതെല്ലാം അപ്രിയമാണ്
(നിര്‍മ്മല പുതുല്‍ )

അവര്‍ വെറുക്കുന്നു ഞങ്ങളെ
ഞങ്ങളുടെ കറുപ്പിനെ ചിരിക്കുന്നു
കളിയാക്കുന്നു ഞങ്ങളെ
പരിഹസിക്കുന്നു ഞങ്ങളുടെ വൈരൂപ്യത്തെ
കളിയാക്കുന്നു ഞങ്ങളുടെ ഭാഷയെ
ഞങ്ങളുടെ നടപ്പിനെ ….ആചാരങ്ങളെ
ഒന്നുമവര്‍ക്കിഷ്ടപ്പെടുന്നില്ല.
ഇഷ്ടപ്പെടുന്നില്ലവര്‍ക്ക് ഞങ്ങളുടെ വസ്ത്രധാരണവും
കാട്ടുജാതിക്കാര്‍,അപരിഷ്കൃതര്‍,പിന്നോക്കക്കാര്‍
എന്നൊക്കെപ്പറഞ്ഞു
വെറുപ്പോടെ നോക്കുന്നു ഞങ്ങളെ
സംസ്കാര ശ്രേഷ്ഠന്മാര്‍ തങ്ങളെന്നു കരുതുന്നവര്‍
ഉപേക്ഷിക്കുന്ന ഞങ്ങളുടെ വസ്തുക്കളെ
അവരാഗ്രഹിക്കന്നില്ല.
ഞങ്ങള്‍ തൊട്ട വെള്ളം കുടിക്കാന്‍
ഞങ്ങളുടെ കൈകളാലുണ്ടാക്കിയ ആഹാരം
സ്വീകാര്യമല്ലവര്‍ക്കെന്നത് സ്വാഭാവികം
അവരുടെ വീടുകളില്‍ ഞങ്ങള്‍ക്ക് പ്രവേശനം നിഷിദ്ധം
അവരാഗ്രഹിക്കുന്നില്ല ഞങ്ങളുടെ ഇടയില്‍ വസിച്ച്
ഞങ്ങളുടെ ഭാഷ പഠിക്കാന്‍
അവരാഗ്രഹിക്കുന്നത് ഞങ്ങളവരുടെ ഭാഷ പഠിക്കാന്‍
അവരുടെ ഭാഷയിലവരോട് സംസാരിക്കാന്‍
സംസ്കാരമുളളവരാകാനവരുടെ ഭാഷ തന്നെ പഠിക്കണം
അവരെപ്പോലെ സംസാരിക്കണം
അവരുമായി ഇടപഴകണം





( സമ്പാദകന്‍ - അശോക് കുമാര്‍ N.A , GHSS പെരുമ്പളം)










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2012 ഫെബ്രുവരി 1, ബുധനാഴ്‌ച

FLASH NEWS

സമ്പൂര്‍ണ്ണ 8,9
ഫെബ്രുവരി 4 വരെ നീട്ടി...
മാര്‍ച്ച് മുതല്‍ സര്‍ക്കാര്‍ ജീവനക്കാരുടെ ശംബളവും
മററാനുകൂല്യങ്ങളും SPARK വഴി മാത്രം.....