2018 ഡിസംബർ 10, തിങ്കളാഴ്‌ച


टीचिंग मैनुअल
कक्षा : 5
इकाई : पाँच
पाठ का नाम : सपना - बूँद का सपना (कहानी)
कालाँश : तीसरा
आशय / धारणा : निजी अनुभवों को कल्पना के साथ कहानी द्वारा अभिव्यक्त कर सकता है।

सामग्री : पाठपुस्तक,टीचर टेक्स्ट, शब्दों का स्लैड़
अधिगम उपलब्धियाँ : पोस्टर बनाने की क्षमता प्राप्त करना ।

प्रक्रिया


आकलन

सपना - बूँद का सपना (कहानी)

ആക്ടിവിറ്റി
वाचन, लेखन, पोस्टर बनाना
പ്രവർത്തനത്തിന്റെ പേര്
कहानी वाचन
പ്രവര്‍ത്തന ഘട്ടങ്ങള്‍
अनौपचारिक संवाद-
पानी का बोतल दिखाते हुए पूछता हैः
इस बोतल में क्या है?
ठीक है, इस बोतल में पानी कैसे पहुँचे होगे?
हरेक प्रश्नों की प्रतिक्रिया के अनुसार चर्चा चलाता है।
बताता है-
ठीक है,बादल में रहनेवाले पानी की बूँद बोतल में आने की कहानी जानना चाहते हैं?
तो पाठ्यपुस्तक के पन्ने 68 से 70 तक के भाग का वाचन कर लो।
वैयक्तिक वाचन करने का अवसर देता है।
दलों में आशयों का लेन-देन करने का अवसर देता है।
आशय ग्रहण के लिए ये प्रश्न पूछते हैं-
  • बूँद ने धरती पर क्या-क्या देखा?
  • बूँद धर्ती पर कैसे पहुँची?
  • टंकी में कैसी पड़ी?
  • बोतल के अंदर कैसे पहुँची?
दलों की प्रस्तुति।
आवश्यक है तो चर्चा चलाता है।
दो-तीन छात्रों से वाचन कराता हैं।
श्यामपट पर या स्लैड़ में ये शब्द दिखाता है।
पानी,मशीन, शहर, नल, टंकी, खेत, गाँव, बोतल, दुकान।
बूँद का सफ़र क्रमानुसार लिखने का निर्देश देता है।
സാമഗ്രികള്‍
    पाठपुस्तक,टीचर टेक्स्ट, शब्दों का स्लैड़
ആശയങ്ങള്‍, ധാരണകള്‍, മൂല്യങ്ങള്‍
निजी अनुभवों को कल्पना के साथ कहानी द्वारा अभिव्यक्त कर सकता है।
വിലയിരുത്തല്‍
आशयों की अभिव्यक्ति का आकलन करता है।
തുടർപ്രവർത്തനങ്ങൾ
नारा गीत



अपनी पहचान










































सपना - बूँद का सपना (कहानी)

ആക്ടിവിറ്റി
वाचन, लेखन, पोस्टर बनाना
പ്രവർത്തനത്തിന്റെ പേര്
पोस्टर
പ്രവര്‍ത്തന ഘട്ടങ്ങള്‍
पूछता है-
पानी सब कहीं है। सबको स्वच्छ पानी मिलने के लिए हम क्या-क्या करेंगे?
चर्चा चलाता है और पानी को लेकर आशयों का मानचित्र तैयार करता है-


बताता है-
इन आशयों के प्रचार के लिए एक पोस्टर तैयार करें।
वैयक्तिक रूप से पोस्टर तैयार करने का अवसर देता है।
दो-तीन की प्रस्तुति।
चर्चा करके पोस्टर की विशेषताएँ श्यामपट पर लिखता है-
उचित संदेश वाक्य है।
उचित रूप विधान है।
आकर्षक है।
सूचकों के आधार पर दलों में परिमारजन करने का अवसर देता है।
पन्ना 71 के चित्रों के सहारे फल और सब्जियों का परिचय कराता है।
एक नमूना लिखता है, जैसे
केला- फल
बाकी तालिका भरने का निर्देश देता है।
इकाई आकलन
चित्र में क्या-क्या है?
लिखने का निर्देश देता है।
वैयक्तिक लेखन करने का अवसर देता है।
जितने शब्द सही हैं, उसके अनुसार तालिका में रंग भरने का अवसर देता है।
സാമഗ്രികള്‍
    पाठपुस्तक,टीचर टेक्स्ट,आशयों के मानचित्र का स्लैड़
ആശയങ്ങള്‍, ധാരണകള്‍, മൂല്യങ്ങള്‍
निजी अनुभवों को कल्पना के साथ कहानी द्वारा अभिव्यक्त कर सकता है।
വിലയിരുത്തല്‍
छात्रों की प्रदर्शिनी का आकलन करता है।
തുടർപ്രവർത്തനങ്ങൾ
पोस्टर की प्रदर्शिनी
अपनी पहचान

























































टीचिंग मैनुअल
कक्षा : 5
इकाई : पाँच
पाठ का नाम : मनु और बाँसुरी
कालाँश : तीसरा
आशय / धारणा : रोचकता, घटनाओं का क्रमिक विकास, चरम सीमा आदि कहानी की विशेषताएँ हैं ।
सामग्री : चित्र
अधिगम उपलब्धियाँ : कहानी का पढ़कर आशय प्रस्तुत करता है ।

प्रक्रिया
आकलन

बाँसुरी - मनु और बाँसुरी (कहानी)

ആക്ടിവിറ്റി
प्रवेश कार्य, कहानी का वाचन
പ്രവർത്തനത്തിന്റെ പേര്
प्रवेश कार्य
പ്രവര്‍ത്തന ഘട്ടങ്ങള്‍
अनौपचारिक संवाद-
पानी की कहानी कैसी लगी?
पानी की सुरक्षा के लिए हम क्या-क्या करेें?
कहता है-
अब हम एक कहानी की ओर जाएँगे।
पन्ना 74 का चित्र वाचन करने का निर्देश देता है और चर्चा करता है।
पूछता हैः-
चित्र में क्य-क्या हैं ?
बच्चों की प्रतिक्रिया श्यामपट पर हिंदी में लिखता है।
मनु को दिखाकर कहता हैः
  • यह मनु है, उसके हाथ में क्या है?
  • क्या आपके पास इस प्रकार का कोई खिलौना है?
बच्चों की प्रतिक्रिया का अवसर देता है।
मनु और बाँसुरी का अटूट संबंध है।
സാമഗ്രികള്‍
    पाठपुस्तक
ആശയങ്ങള്‍, ധാരണകള്‍, മൂല്യങ്ങള്‍
रोचकता, घटनाओं का क्रमिक विकास, चरम सीमा आदि कहानी की विशेषताएँ हैं ।
വിലയിരുത്തല്‍
मौखिक अभिव्यक्ति का आकलन
തുടർപ്രവർത്തനങ്ങൾ
अपनी पहचान








2018 ജൂലൈ 20, വെള്ളിയാഴ്‌ച


टिप्पणी


टूटा पहिया

श्री धर्मवीर भारति बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार है। वे प्रयोगवादी कवि के रूप में विख्यात है। टूटा पहिया श्री. धर्मवीर भारति की बहुचर्चित कविता है। महाभारत की कथा में वर्णित अभिमन्यु के रथ का ‘टूटा पहिया’ कवि की दृष्टि में टूटे हुए मन का प्रतीक बन गया है । आधुनिक संदर्भ में वह व्यक्ति जो अन्याय के सामने नतमस्तक है, शौर्यहीन है, उसके लिए यह टूटा व्यक्ति भी नवीन युग के निर्माण का आश्रय बन सकता है, इन संभावनाओं के मध्य कवि की आस्थावादी दृष्टि इस तरह प्रकट की है-
कवि के मत में यह युग अंधा है। टूटे पहिए का प्रतीकात्मक चित्रण करके कवि ने संकेत किया है कि आज संसार में सर्वत्र मानव मूल्यों का अभाव है। सारे मानव मूल्य टूट गए हैं। फिर भी कवि निराश नहां है। कवि का विश्वास है कि पतन के गर्भ में जानेवाली दुनिया को ये जर्जर मूल्य ही सहायक सिद्ध होंगे। टूटा पहिया कविता में यही आसावादी स्वर मुखरित हुआ है।
कवि कहते हैं कि मैं रथ (जीवन) का टूटा पहिया (टूटा हुआ मानव मूल्य) हूँ। लेकिन मुझे फेंको मत। क्यों कि शोषण और पीड़न से संत्प्त कोई दुस्साहसी अभिमन्यु(साधारण जन) मुझे अपने हाथ में लेगा। हो सकता है वह अक्षौहिणी सेनाओं को (अत्याचारी शोषकों को) चुनौती देता हुआ शोषण-पीड़न की व्यवस्था का शिकार हो जाए।
महाभारत युद्ध में अधर्म और अत्याचार का विरोध करते हुए दुस्साहसी अभिमन्यु ने टूटे पहिए से कौरवों की अक्षौहिणी सेनाओं का सामना किया था। उसी तरह अधर्म का विरोध करने केलिए साधारण जनता आगे आएगी, इस आशय का संकेत कवि ने इन पंक्तियों में दिया है।
अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी महाभारत युद्ध में बड़े-बड़े महारथी मिलकर निरायुध अभिमन्यु पर आक्रमण किया था। किसी ने अभिमन्यु की असहाय आवाज़ पर ध्यान नहीं दिया। तब मैं (मानव मूल्य) टूटा पहिया बनकर आभिमन्यु के हाथ का हतियार बना था (अभिमन्यु ने रथ के टूटे पहिए का हथियार बना लिया था)। सब के द्वारा उपेक्षित मानव मूल्य कहता है कि मैं रथ का टूटा पहिया हूँ। मैं ब्रह्मास्त्रों (अधर्म और अत्याचार) से लड़ सकता हूँ। इसलिए मुझे फेंको मत।
कवि ने परोक्ष रूप में इस बात की ओर संकेत किया है कि आज संसार में टूटे मानव मूल्यों की आवश्यकता है।
समाज के इतिहास की गति सत्य और धर्म के पथ को छोड़कर चले तो सच्चाई को टूटे हुए पहियों का आश्रय लेना पड़ता है। अर्थात पतन के गर्भ में जानेवाली दुनिया को मानव मूल्यों का आश्रय लेना ही पड़ेगा। कवि के कहने का तात्पर्य यह है कि आज के जो उपेक्षित मानव मूल्य है, हो सकता है कल उनकी ज़रूरत हो।

2018 ജൂൺ 29, വെള്ളിയാഴ്‌ച


 

 
गणित के माटसाब सुरेंदर जी ने बेला के बालों में पंजा फँसाया। उस दिन घर आकर वह अपनी डायरी में क्या लिखती होगी? वह डायरी तैयार करें।
फुलेरा
तारीख
           आज का दिन मैं कैसे भूलूँ? इतना बुरा दिन ज़िन्दगी में पहली बार आया है। गणित का पीरियड था। क्लास में आते ही माटसाब काँपी जाँचने लगे। काँपी जाँचते वक्त मास्टरजी की नज़र मुझपर पडी। मैं ने तो काँपी लिखी थी। फिर भी मैं भय से काँप रही थी। बिना कुछ कहे मास्टर जी मेरे बाल पकडकर फेंका। सब बच्चों की नज़र मुझपर पडी। मेरे भयभीत चेहरे को देखकर साहिल बुरी तरह डर गया था। मुझे ऐसा लगा कि मैं अभी गिर जाऊँगी। कुछ समय के बाद मास्टर जी ने काँपी मेरे बैठने की जगह पर फेंकी और मुझसे बैठने को कहा। मुझे अब भी पता नहीं कि मेरी गलती क्या थी। ऐसा अनुभव जीवन में कभी नहीं हुआ है। यादें मन से दूर होती नहीं। एक दुर्दिन की समाप्ति

2018 ജൂൺ 24, ഞായറാഴ്‌ച




 पुल बनी थी माँ

                            पत्र




स्थान ................................
तारीख ...............................
प्रिय बेटा रमेश,
            तुम कैसे हो। ठीक है न? घर में क्या-क्या समाचार हैं? सब कुछ ठीक-ठाक है न ‌? बच्चों की पढ़ाई कैसे चल रही है? क्या तुम्हें कोई नौकरी मिली? तुम्हारा सिर-दर्द ठीक हो गया? तुम्हारी बीवी कैसी है? तुम्हारे भैया लोग आते हैं क्या? सुरेश की दुकान कैसे चल रही है? गणेश आफीस जाते हैं न?
           यहाँ मैं कुशल हूँ। समय पर भोजन,दवा सब कुछ मिलती है। बस तुम लोगों की चिंता है। भगवान से केवल यही प्रार्थना है कि तुम लोग हमेशा सुखी रहे। अगले जन्म में भी तुम्हारा प्यार मिलें। इतना लिखकर समाप्त करती हूँ। जवाब ज़रूर लिखना। प्यार के साथ,
तुम्हारी माँ
(हस्ताक्षर

2018 ജൂൺ 22, വെള്ളിയാഴ്‌ച




दृश्य-1


पार्श्व संगीत / संवाद

सबेरे 9.00 बजे
एक बरसाती दिन।
पानी बहने की आवाज़। आकाश काले बादलों से भरा है।
पुस्तक की थैली पीठ पर लादे एक लड़का
और लड़कीस्कूल की ओर चल रहे हैं। वे स्कूली यूनिफार्म में है।


वे खेत की ओर जाते हैं।






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(दोनों स्कूल की ओर चलते हैं।)
फुलेरा कस्बे की लगभग सूनी, तंगी गली ।
घंटियां बजाकर बीच-बीच में चलनेवाले फेरीवाले।
छह-सात गद्दों के पीछे चलनेवाले एक अर्ध-नग्न कुम्हार।
खामोश खड़े विजली के खंभे।
गली से स्कूल की ओर चलनेवाले साहिल और बेला।

पानी बहने की आवाज़





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साहिल : देखो बेला, यहाँ बीरबहूटियाँ होगी।
बेला : ठीक हैं, देखो, ये बीरबहूटियाँ कितना मुलायम है !
साहिल : हाय, इनका रंग तुम्हारा रिब्बन जैसा लाल है।
बेला : साहिल, तुमने कुछ सुना है ?
साहिल : क्या ?
बेला : स्कूल की पहली घंटी बजी है। जल्दी जाना है।
साहिल : मुझे कलम में स्याही भरवाना है, आओ।

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उचित, हलका पार्श्व संगीत।